Sunday, 30 December 2012

हृदय सोना जुही  का चीरा  गया है 
रंग जिससे जाम का गहरा गया है 

अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी 
गाँव का कोमार्य  दिन मैं लुट गया है 

गिरि जिसने गिरा , गढ़े  नए रस्ते 
वह मसीहा फिर से फाँसी चढ़ गया है 

तिमिर ने दीपक ख़रीदे  शहर भर के 
पहरुआ  अब यह अँधेरा हो गया है 

बात ज्योति की करे अब कौन किससे 
शख्स  हर अँधा और बहरा हो गया है 

3 comments:

  1. बात ज्योति की करे अब कौन किससे
    शख्स हर अँधा और बहरा हो गया है

    हृदय को जकझोर देने वाले असरार आपसे जल्दी ही और रचनाओ की उम्मीद है
    --

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  2. ♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
    ♥नव वर्ष मंगबलमय हो !♥
    ♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥




    अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
    गांव का कौमार्य दिन में लुट गया है

    वाऽह ! क्या बात है !
    हालात को बयान करते शब्द !

    आदरणीया सुमित्रा शर्मा जी
    ब्लॉग की पहली पोस्ट के लिए मुबारकबाद !

    आशा है आपके सुंदर , सार्थक , श्रेष्ठ सृजन से ब्लॉगजगत लाभान्वित होगा …

    नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार
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    1. उत्साह वर्धन के लिए शुक्रिया राजेंद्र जी
      आशा है आपकी शुभकामनाये असर करेंगी और मै कुछ रोचक और उपयोगी रचनाये लिख सकुंगी
      नव वर्ष आपके लिए भी मंगलमय हो

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