हृदय सोना जुही का चीरा गया है
रंग जिससे जाम का गहरा गया है
अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
गाँव का कोमार्य दिन मैं लुट गया है
गिरि जिसने गिरा , गढ़े नए रस्ते
वह मसीहा फिर से फाँसी चढ़ गया है
तिमिर ने दीपक ख़रीदे शहर भर के
पहरुआ अब यह अँधेरा हो गया है
बात ज्योति की करे अब कौन किससे
शख्स हर अँधा और बहरा हो गया है
रंग जिससे जाम का गहरा गया है
अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
गाँव का कोमार्य दिन मैं लुट गया है
गिरि जिसने गिरा , गढ़े नए रस्ते
वह मसीहा फिर से फाँसी चढ़ गया है
तिमिर ने दीपक ख़रीदे शहर भर के
पहरुआ अब यह अँधेरा हो गया है
बात ज्योति की करे अब कौन किससे
शख्स हर अँधा और बहरा हो गया है

बात ज्योति की करे अब कौन किससे
ReplyDeleteशख्स हर अँधा और बहरा हो गया है
हृदय को जकझोर देने वाले असरार आपसे जल्दी ही और रचनाओ की उम्मीद है
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ReplyDelete♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
♥नव वर्ष मंगबलमय हो !♥
♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥
अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
गांव का कौमार्य दिन में लुट गया है
वाऽह ! क्या बात है !
हालात को बयान करते शब्द !
आदरणीया सुमित्रा शर्मा जी
ब्लॉग की पहली पोस्ट के लिए मुबारकबाद !
आशा है आपके सुंदर , सार्थक , श्रेष्ठ सृजन से ब्लॉगजगत लाभान्वित होगा …
नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित…
राजेन्द्र स्वर्णकार
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उत्साह वर्धन के लिए शुक्रिया राजेंद्र जी
Deleteआशा है आपकी शुभकामनाये असर करेंगी और मै कुछ रोचक और उपयोगी रचनाये लिख सकुंगी
नव वर्ष आपके लिए भी मंगलमय हो