हृदय सोना जुही का चीरा गया है
रंग जिससे जाम का गहरा गया है
अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
गाँव का कोमार्य दिन मैं लुट गया है
गिरि जिसने गिरा , गढ़े नए रस्ते
वह मसीहा फिर से फाँसी चढ़ गया है
तिमिर ने दीपक ख़रीदे शहर भर के
पहरुआ अब यह अँधेरा हो गया है
बात ज्योति की करे अब कौन किससे
शख्स हर अँधा और बहरा हो गया है
रंग जिससे जाम का गहरा गया है
अब लुटेरे कर रहे हैं थानेदारी
गाँव का कोमार्य दिन मैं लुट गया है
गिरि जिसने गिरा , गढ़े नए रस्ते
वह मसीहा फिर से फाँसी चढ़ गया है
तिमिर ने दीपक ख़रीदे शहर भर के
पहरुआ अब यह अँधेरा हो गया है
बात ज्योति की करे अब कौन किससे
शख्स हर अँधा और बहरा हो गया है
